Delhi:- भारत की अंतरिक्ष यात्रा कभी कुछ वैज्ञानिकों, सीमित संसाधनों और अपार जिज्ञासा के साथ शुरू हुई थी। लेकिन आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं जहाँ सपनों को सिर्फ आकाश नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचाने की क्षमता हमारे पास है। इसका ताज़ा उदाहरण है—स्काईरूट इनफिनिटी कैंपस का उद्घाटन और विक्रम-I का अनावरण।
2 लाख वर्ग फुट में फैला यह अत्याधुनिक परिसर सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि भारत के नए अंतरिक्ष युग का प्रतीक है। यहाँ हर महीने एक ऑर्बिटल रॉकेट का निर्माण संभव है—जो किसी भी विकसित देश की क्षमता से कम नहीं।
यहाँ डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण से जुड़ी सभी सुविधाएँ मौजूद हैं, जो यह बताती हैं कि भारत अब सिर्फ अंतरिक्ष में कदम नहीं रख रहा, बल्कि अपनी दिशा खुद तय कर रहा है।
विक्रम-I सिर्फ एक रॉकेट नहीं है—यह युवा भारतीयों के साहस, नवाचार और जुनून का प्रतीक है। इसे आधुनिक तकनीक से निर्मित किया गया है ताकि उपग्रहों को सटीकता के साथ कक्षा में स्थापित किया जा सके।
यह कदम दिखाता है कि निजी कंपनियाँ भी अब भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नई गति देने के लिए तैयार हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से स्काईरूट इनफिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्काईरूट के पहले कक्षीय रॉकेट विक्रम-I का भी अनावरण किया। यह रॉकेट उपग्रहों को अंतरिक्ष कक्षा में स्थापित करने के लिए निर्मित किया गया है।
स्काईरूट भारत की अग्रणी निजी अंतरिक्ष कंपनियों में से एक है। कंपनी का इनफिनिटी कैंपस 2 लाख वर्ग फुट में फैला एक अत्याधुनिक परिसर है, जिसमें प्रति माह एक ऑर्बिटल रॉकेट बनाने की क्षमता है। यह परिसर लॉन्च वाहनों के डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण से जुड़ी सुविधाएँ प्रदान कर भारत की निजी अंतरिक्ष क्षमताओं को सुदृढ़ करता है। कैंपस तेलंगाना के हैदराबाद में बना है। कंपनी का हेड ऑफिस भी यहीं है। स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी की स्थापना पवन चंदना और भरत ढाका ने 2018 में की थी। यह दोनों IIT पासआउट हैं और ISRO के पूर्व साइंटिस्ट रह चुके हैं।

उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई थी, लेकिन आज भारत वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
यह संदेश सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि हर युवा के लिए प्रेरणा है
अगर शुरुआत छोटी भी हो, तो लक्ष्य आसमान से भी ऊपर हो सकते हैं।
अब स्काईरूट के प्राइवेट रॉकेट विक्रम-I क्यों है खास
पीएम मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I को दुनिया के सामने रखा। इस रॉकेट की ऊंचाई 26 मीटर यानी करीब 85 फीट है। रॉकेट को प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बनाया है। इस रॉकेट को 2026 में लॉन्च किया जाएगा। यह अपने साथ 300 किग्रा सैटेलाइट ले जाने में सक्षम है।
रॉकेट स्काईरूट कंपनी का पहला लॉन्च व्हीकल है जो उपग्रहों को कक्षा (ऑर्बिट) में पहुंचा सकेगा। यह रॉकेट छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए बनाया गया है।
Vikram-1 का स्ट्रक्चर पूरी तरह कार्बन कंपोजिट से बना है और इसमें 3-D प्रिंटेड लिक्विड इंजन का इस्तेमाल है। जिससे यह हल्का और मजबूत है।
रॉकेट एक बार फायर होने के बाद फिर रिस्टार्ट हो सकता है। जिससे एक ही लॉन्च में कई उपग्रहों को अलग-अलग ऑर्बिट में छोड़ा जा सकता है।
कंपनी का दावा है कि यह रॉकेट ऑन डिमांड तैयार किया जा सकता है। इसे 24 घंटे के भीतर किसी भी लॉन्च साइट से लॉन्च किया जा सकता है।
